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अन्ध-विश्वास के साथ मेरी जंग : कुछ अनुभव -101

अन्ध-विश्वास के साथ मेरी जंग : कुछ अनुभव -101 - पंकज अवधिया “क्या किसी विशेष बीमारी के मरीज बढ रहे है आजकल?” मै अक्सर अपने वानस्पतिक सर्वेक्षणो के दौरान पारम्परिक चिकित्सको से यह प्रश्न पूछ लेता हूँ। कभी-कभी चौकाने वाले जवाब मिलते है। इन चौकाने वाले जवाबो को मै अपने डेटाबेस मे दर्ज कर लेता हूँ। साथ ही इसमे आधुनिक वैज्ञानिक शोधो को भी शामिल कर लेता हूँ। इस बार छत्तीसगढ मे मैदानी भागो के पारम्परिक चिकित्सको ने बताया कि बडे शहरो से यकृत (लीवर) की खराबी वाले बहुत से मरीज आ रहे है। ये मरीज सभी उम्र के है। जब हम उनसे खान-पान के बारे मे पूछते है तो सभी मरीजो के एक चीज समान होती है। बहुत से मरीजो ने हमे वह चीज लाकर भी दिखायी पर हम समझ नही पाये। आप ही बताइये, ये क्या चीज है? इसके बारे मे शहरो मे अन्ध-विश्वास है कि इसे पीने से सारे रोग मिट जाते है। किसी तरह की बीमारी नही होती। इसके लिये लोग पानी की तरह पैसे बहाते है और फिर लीवर की बीमारी के साथ हमारे पास आ जाते है। पारम्परिक चिकित्सको की बात सुनकर मैने वह चीज देखी तो चौक पडा।...

अन्ध-विश्वास के साथ मेरी जंग : कुछ अनुभव -64

अन्ध-विश्वास के साथ मेरी जंग : कुछ अनुभव -64 - पंकज अवधिया ‘किसान जब खेत मे प्रवेश करे तो उत्तर दिशा से प्रवेश करे। प्रवेश करते ही जोर से हाथो मे पकडी घंटी बजाये। फिर यूकिलिप्टस के पौधे पर वृद्धि हारमोन डाले। उसके बाद एक विशेष टोपी पहनकर खेती का कार्य शुरु करे। यदि किसान हमारे द्वारा बताये उपायो को अपनाता है तो फसल दोगुनी होगी और जो उसने जिन्दगी भर मे नही कमाया होगा वह एक साल मे कमा लेगा।‘ ऐसा दावा करता एक पत्र मुझे एक किसान ने दिखाया। पत्र के नीचे जिन महानुभाव का नाम लिखा था वे मेरे सहपाठी निकले कृषि महाविद्यालय के। मैने झट से उसे फोन लगाया। उसके फोन उठाते ही प्रश्नो की झडी लगा दी। वह बोला कि यह विज्ञान मेरे द्वारा विकसित किया गया है और यदि इसे समझाना है तो मेरी दुकान आना होगा। दुकान? कौन-सी दुकान? उसने कहा, कृषि सेवा केन्द्र खोला है। वही आ जाना। मै दूसरे दिन पहुँच गया। नौकर दुकान मे था। महाश्य नदारद थे। मुझे बताया गया कि बस आते ही है, आप बैठिये। मैने दुकान का मुआयना करना शुरु किया। कृषि केन्द्र मे तो सबसे पहले एक पुस...