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कैंसर के ३५,००० पारंपरिक नुस्खों पर काम आखिर शुरू हो ही गया

कैंसर के ३५,००० पारंपरिक नुस्खों पर काम आखिर शुरू हो ही गया - पंकज अवधिया जीवन में किसी भी चीज का लंबा इंतज़ार महंगा पड़ सकता है| वर्तमान आपके हाथ में है पर भविष्य के बारे में कुछ भी निश्चित नहीं है| कैंसर की चिकित्सा में प्रयोग होने वाले ३५,००० से अधिक पारंपरिक मिश्रणों के विषय में मैंने पिछले दो दशकों में जानकारियाँ एकत्र की और फिर उसे अपने ज्ञान से समृद्ध किया|मधुमेह यानि डायबीटीज पर अपने निज व्यय से सैकड़ो जीबी की रपट तैयार करने के बाद मैंने सोचा कि कैंसर के जटिल पारंपरिक नुस्खों के दस्तावेजीकरण की मदद के लिए कोई तो भारतीय शोध संस्थान सामने आयेगा पर ऐसा हुआ नहीं| अंतत: मैंने निश्चय किया कि मै अपने निज व्यय पर इन नुस्खों को वैज्ञानिक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा| इस प्रयास के पहले चरण में 1000 से अधिक पारंपरिक मिश्रणों के विषय में आरंभिक जानकारी इस साईट पर उपलब्ध कराई गयी है| कैंसर की जडी-बूटियों से आम लोग चमत्कार की आशा करते हैं| उनका मानना होता है कि चमत्कारी दवा की एक खुराक से कैंसर ठीक हो जाएगा| ऐसे दावे ...

क्या कुत्ते बचा सकते थे उन अभागे जवानो को मौत के मुंह में जाने से?

क्या कुत्ते बचा सकते थे उन अभागे जवानो को मौत के मुंह में जाने से? - पंकज अवधिया "अरे, वह क्या है? ठहरो कोई कुत्ता लगता है| इतने घने जंगल में कुत्ता!! कही यह सोनकुत्ता तो नहीं है? अरे, यह तो देसी कुत्ता है|" मैंने बेसब्र होते हुए कहा| फिर उसे अनदेखा करके आगे बढ़ने लगा| तभी साथ चल रहे स्थानीय व्यक्ति ने टोका कि यह खतरनाक हो सकता है| बेहतर होगा कि आप अपने स्थान पर ऐसे ही खड़े रहें| मैंने उसकी बात मानी| कुछ ही पल में झाड़ियों में हलचल हुयी और अच्छी कद काठी वाले दो लोग तीर धनुष लिए प्रकट हुए| हमारी जान में जान आयी| ये कमार आदिवासी थे| हमने उनके कुत्ते से न उलझने का निर्णय लेकर ठीक ही किया| ये बड़े ही वफादार होते हैं और जंगल में निडरता से विचरते रहते है| उनके मालिक ने एक सीटी मारी नहीं कि वे हाजिर हो जाते है| वे शिकार में मदद करते है और अपने मालिक की रक्षा करते हैं| लम्बी दूरी से अनजानों को देखकर वे पीछे लगा जाते है और मालिक को सचेत कर देते हैं| ये निहायत ही देशी कुत्ते हैं पर काम में किसी से कम नहीं| चिंतलनार के जंगल की खबर कल जब मै सुन रहा...

चिदम्बरम या रमन किस पर मढा जाए ८० मौतों का दोष?

चिदम्बरम या रमन किस पर मढा जाए ८० मौतों का दोष? -पंकज अवधिया दंतेवाडा में शहादत की खबर आयी नहीं कि चिदम्बरम एंड कंपनी से ग्रीन हंट बंद करने की मांग उठने लगी| लोग रमन सिंह के बारे में कहने लगे कि और मजे उडाओ हरिद्वार में और फिर ४० लाख लुटा आओ पर इस संकट के समय में मुझे भाजपा की ओर से आये पहले बयान ने अभिभूत कर दिया| उस बयान में कहा गया कि हम राजनीति भूलकर सरकार के साथ है| इस हत्याकांड के लिए राजनीति के नाम पर खेमों में बंटने की जरूरत नहीं है| यदि हम आरोप-प्रत्यारोप करते रहेंगे तो दुश्मनों के हौसले बढ़ेंगे| हम सब दुखी है पर यह वक्त है दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब देने का और आस्तीन के सांपो को मारने का| हम सभी को एक जुटता दिखाते हुए उन लोगों को साथ खडा होना होगा जो हमारे लिए दुश्मनों से लड़ रहे हैं| इस दुखद घड़ी में राजनीति का खेल खेलने वालों से ज़रा परहेज ही करें|

उन बाघों के बहाने जंगल की बातें जो १४११ की सूची में नहीं हैं, एक नयी लेखमाला

उन बाघों के बहाने जंगल की बातें जो १४११ की सूची में नहीं हैं| भाग-१ -पंकज अवधिया मातारानी के जंगल में बसने वाला बाघ "क्या वाकई यहाँ बाघ हैं?" मैंने अपने साथ चल रहे वन सुरक्षा समिति के सदस्य श्री शंकर से पूछा| "हां, बिल्कुल है| आप रात तक रुके आपको उसकी दहाड़ दूर से सुनायी देगी| हो सकता है कि आपको वह दिखाई भी दे दे|" शंकर की बात में आत्म-विश्वास साफ़ झलकता था| मुझे याद आता है कि इसी जंगल में भटकते हुए कुछ महीने पहले जब साथ चल रहे पारंपरिक चिकित्सक एक स्थान पर ठिठक गए तो मैंने कारण पूछा| उन्होंने कहा कि आगे वह गुफा है जिसका प्रयोग बाघ अक्सर करता है| गुफा से सड़े-गले मांस की बदबू आ रही थी| पारंपरिक चिकित्सको ने जोखिम उठाना सही नहीं समझा| हम उलटे पैर वापस आ गये| वैसे भी हम तो जडी-बूटियों के लिए वहां गए थे| जंगली जानवरों से दूरी रखना ही ठीक है| वापस लौटने के बाद मैंने जब अपने वन विभाग में काम कर रहे मित्रों से इस बारे में पूछा तो वे जोर से हंस पड़े और कहा कि यहाँ कहाँ बाघ है? ग्रामीणों ने आपको "बना...

अब हिन्दी विकीपीडिया भी चला चोरी की राह पर???

कुछ वर्षों पहले माननीय संजीव तिवारी जी के ब्लॉग पर मैंने पीले पलाश पर एक लेख लिखा था | आज जब मैं गूगल के माध्यम से इसे तलाश रहा था तो यही सामग्री विकीपीडिया में मिली | सामग्री कुछ घुमा-फिराकर लिखी गयी है पर कुछ वाक्य तो जस के तस हैं| अब इसमे इस चोर का नाम तो नहीं लिखा है पर मै प्रयासरत हूँ कि इसे बेनकाब किया जाए| http://hi.wikipedia.org/wiki/ पलाश ( इस लिंक के लिए कापी पेस्ट तकनीक अपनाए| सीधे क्लिक करने पर कुछ दूसरा ही पेज खुलता है | ) यदि ये महाशय अनुमति ले लेते या सामग्री का स्रोत लिख देते तो कुछ शराफत झलकती, इन्होने ने पूरा मैटर ही उड़ा लिया| पता चला कि इन्होने बहुत से लेखों को चुराया है इसी तरह हिन्दी सेवा के नाम पर| ज्यादातर ब्लॉगर से चुराई गयी सामग्री है| मै आगे इनका खुलासा करूंगा|

एक नया मातम "औषधीय मातम"

जी, आपने बिलकुल सही पढ़ा "औषधीय मातम" | हिन्दी शब्दकोश में यह एकदम नया है और यह गूगल की ओर से भेंट है| दरअसल कल मुझे एक मेल मिला जिसमे मुझसे "छत्तीसगढ़ में धान की फसल में औषधीय मातम" शीर्षक वाले लेख की एक प्रति माँगी गयी| औषधीय मातम पढ़कर मैं चौक गया| जब मैंने उनसे फिर से जानकारी माँगी तो पता चला कि गूगल का हिन्दी ट्रांसलेटर अंगरेजी के "मेडीसिनल वीड्स" का अनुवाद औषधीय खरपतवार की जगह औषधीय मातम कर रहा है| पता नहीं किस प्रकार के हिन्दी कम गूगल (ज्यादा) सेवक ने वीड्स के लिए मातम शब्द फीड किया है| अर्थ का अनर्थ हो गया | http://translate.google.com/#en|hi|Medicinal%20Weeds

मकोड़ा खाइए और मर्द बन जाइए

औषधीय मकोड़े रेड वेलवेट माईट पर मेरे शोध कार्यो को छत्तीसगढ़ के एक अखबार जनसत्ता ने बड़े ही रोचक ढंग से प्रकाशित किया था| आज जब मैंने इसपुरानी अखबारी कतरन को अपने ब्लॉग में डाला तो सहसा श्री राजकुमार सोनी जी के नाम पर नजर पडी, वे हिन्दी ब्लागिंग में सक्रीय है| उनकी रिपोर्टिंग ने इस शोध को सनसनीखेज बना दिया| मै उनके लेखन का सदा ही से कायल रहा हूँ| आप भी पढ़ें इसे मकोड़ा खाइए और मर्द बन जाइए

रोज अस्पताल पहुंच रहे हजारों बच्चों को बचाने का कोई उपाय है आपके पास मनमोहन और रमन जी?

रोज अस्पताल पहुंच रहे हजारों बच्चों को बचाने का कोई उपाय है आपके पास मनमोहन और रमन जी? - पंकज अवधिया कुछ दिनों पहले ही छत्तीसगढ़ के रायगढ़ और राजस्थान के अलवर जिले में दस से ज्यादा बच्चो ने फिर रतनजोत (जैट्रोफा) के बीज खा लिए| उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया| जब से रतनजोत का व्यापक रोपण आरम्भ हुआ है तब से हजारों बच्चो के अस्पताल पहुंचने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है | अब तक पांच बच्चे रतनजोत खाकर मारे जा चुके हैं| हाल ही में विनराक इंटरनेशनल द्वारा जैव-ईधन पर एक बड़ा आयोजन पन्च सितारा होटल में किया गया जिसमे रतनजोत के गुणों का बखान किया गया| मजबूरीवश इस आयोजन में जा रहे प्रतिभागियों ने मुझसे पूछा कि आपकी ओर से आयोजकों को क्या कहना है? मैंने कहा कि ऐसे आयोजन के उदघाटन सत्र में कुछ पलों का मौन रखकर उन हजारो प्रभावित बच्चो को याद कर लिया जाये तो रतनजोत का अभिशाप झेल रहे हैं| पर आयोजकों ने इस राय को अनसुना कर दिया| वर्ष २००४ में ही मैंने रायपुर से छपने वाले दैनिक नवभारत के ...

व्हाट ए फूलिश आइडिया अभिषेक और किरण जी : कुछ तो शर्म करें

व्हाट ए फूलिश आइडिया अभिषेक और किरण जी : कुछ तो शर्म करें - पंकज अवधिया मोबाइल के बढ़ते प्रयोग से चिड़ियों का बसेरा उजड़ रहा है| वे कैसे भी इन मोबाइल टावरो से दूर रहना चाहती हैं| सलीम अली इंस्टिट्यूट आफ ओर्निथोलोजी एंड नेचुरल हिस्ट्री के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि मोबाइल टावरो से निकलने वाले चुम्बकीय विकीरण से न केवल चिड़ियों पर असर पड़ता है बल्कि उनके अंडे भी नष्ट हो जाते है| मोबाइल का प्रचार-प्रसार प्रकृति के लिए अभिशाप बनता जा रहा है| जब चिड़िया नहीं रहेंगी तो वे बीजों को नहीं फैलाएंगी और जब बीज नहीं फैलेंगे तो जंगल कैसे बचेंगे? यह सीधी सी बात है जो अब वैज्ञानिक अध्ययनों से प्रमाणित भी हो चुकी है| ऐसे में टीवी में दिखाए जा रहे एक विज्ञापन में चिडियों के समूह का कहना कि व्हाट एन आइडिया सर जी, आम लोगो को तमाचे की तरह लगता है| कैसे एक सफ़ेद झूठ खुलेआम दिखाया जा रहा है अपने उत्पाद को बेचने के लिए| इस झूठ को प्रचारित कर रहा है एक अभिनेता जिसे शायद ही प्रकृति के बारे में कुछ समझ हो| आप किसी डाक्टर में पास जाएँ और उससे पूछें कि जमीन हड़पने के केस में कौन सी धाराए लगें...

टीटरा पूँछी : मधुमेह रोगियों के लिए वरदान

हम आप मधुमेह में उपयोगी बहुत सी औषधीय वनस्पतियों के विषय में जानते हैं पर फिर भी ज्यादातर वनस्पतियों के विषय में अभी भी कम ही जानकारी है| ये वनस्पतियाँ घने जंगलों में पायी जाती हैं और पारंपरिक चिकित्सा में प्रयोग की जाती हैं| इनमे से ज्यादातर वनस्पतियों के विषय में हमारे प्राचीन ग्रन्थ भी ज्यादा कुछ नहीं बताते हैं| ऐसी ही एक वनस्पति है टीटरा पूँछी | इसके विषय में पारंपरिक ज्ञान का मैंने दस्तावेजीकरण किया है| पिछले दिनों दैनिक नवभारत ने इस विषय में विस्तार से प्रकाशित किया| आप इस लिंक में जाकर पूरी जानकारी पा सकते हैं| मधुमेह रोगियों के लिए वरदान है टीटरा पूँछी Updated Information and Links on March 08, 2012 New Links :  http://www.scribd.com/doc/ 83154451/Remedial-Measures- for-Toxicity-of-Traditional- Herbal-Medicines-Recent- Topics-in-Pankaj-Oudhia%E2%80% 99s-Medicinal-Plant-Database- Part-1 http://www.scribd.com/doc/ 83041234/New-Topics-in-Pankaj- Oudhia%E2%80%99s-Medicinal- Plant-Database Related Topics in Pankaj Oudhia’s Medicinal Plant Database at...

अपना मल खाने और अपना मूत्र पीने की इच्छा

भगवान न करे ऐसी इच्छा कभी किसी को हो पर जिस पर यह गुजरती है उसकी हालत क्या होती होगी, यह आप सोच भी नहीं सकते है| कुछ वर्षों पहले एक बालक को लेकर उसके माता-पिता मुझसे मिले| बालक की इस बुरी आदत से वे परेशान थे और इस नाम पर उसकी जबरदस्त धुनाई भी की जाती थी| मुझे तो सबसे पहले होम्योपैथी की याद आयी पर उन्होंने दो टूक कह दिया कि हमने सभी उपलब्ध इलाज कराये है| विशेषज्ञ तो इसे मानसिक रोगी घोषित कर चुके है| उन्हें मुझसे बड़ी उम्मीद थी पर मै तो ठहरा कृषि वैज्ञानिक| यह अलग बात है कि मैंने पारंपरिक चिकित्सकीय ज्ञान का दस्तावेजीकरण किया है| मैंने उन्हें पारंपरिक चिकित्सको के पास भेजा| एक के बाद दूसरे, दूसरे के बाद तीसरे पर नतीजा सिफर रहा| थक-हार कर एक पारंपरिक चिकित्सक ने दूब की सहायता से बालक को ठीक कर दिया| दूब का ऐसा सरल पर अनोखा प्रयोग मैंने पहले न देखा था और न ही सुना था| ( "पारंपरिक चिकित्सा से ठीक किये गए सौ अजीबोगरीब रोग" नामक पुस्तक के कुछ अंश- लेखक-पंकज अवधिया, पुस्तक प्रकाशन की प्रक्रिया में ) Updated Information and Links on March 20, 2012 New Links :  http://ww...